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Saturday 24th of August 2019
ब्लॉगर मंच

धनबल और बाहुबल को दिखाएं ठेंगा, निडर होकर डालें वोट

jahid hussian

लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद से ही राजनीतिक दलों में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग भी चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। पूरे देश की नजर  आम चुनाव-2019 पर टिकी हुई हैं। यह चुनाव सबसे महंगा चुनाव होने वाला है। पैसा पानी की तरह बहाया जाएगा। इस चुनाव में तमाम प्रत्याशी धनबल का सहारा लेकर वोटर को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

करीब 20 साल से आम चुनावों में धनबल और बाहुबल की भूमिका बढ़ती जा रही है। चुनाव आयोग की सक्रियता के कारण बाहुबल तो लगभग समाप्त हो गया, लेकिन धनबल की भूमिका अभी भी पर्दे के पीछे से बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि इसे लेकर चुनाव आयोग सक्रिय नहीं है। चुनाव के समय चुनाव आयोग धनबल को रोकने के लिए पूरी तरह सक्रिय रहता है, नंबर-2 की रकम जब्त भी की जाती है, बावजूद धनबल चुनाव को प्रभावित करता है।

बात आती है चुनाव जीतने की तो काफी नेता बाहुबल और पैसे के बल पर चुनाव जीतने की कोशिश करेते हैं। इसके लिए वह मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर रिझाने की कोशिशें करते हैं।

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं होगा, जब मतदाताओं को इस तरह से लुभाने की कोशिश की जाएगी। देश के कई हिस्सों में हर बार वोटरों को लुभाकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

चुनाव के समय नेताओं की ओर से धन के साथ-साथ शराब भी बांटी जाती है। वोटरों को लुभाने के लिए हर चुनाव में तरह-तरह के प्रयास होते रहे हैं। अब देखना होगा कि मतदाता हर बार की तरह इन प्रलोभनों में पड़ता है या इन प्रलोभनों में ना आकर अपने मत का सही इस्तेमाल करता है। इससे पहले भी नेताओं की ओर से मतदातओं को लुभाने के लिए ऐसे प्रयास होते रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग के जागरुकता अभियान के कारण मतदाता की समझ बढ़ी है। चुनाव आयोग अखबारों में 'मेरा वोट बिकाऊ नहीं है' जैसे विज्ञापन देकर भी लोकतंत्र को मजबूत करने की अनूठी मुहिम भी चला रहा है।

जरूरत है कि आयोग को बाहुबल की तरह धनबल के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह रोक लगानी चाहिए। हालांकि मेरा मानना तो यही है कि देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव में अपनी हिस्सदारी निभाते हुए ऐसे प्रलोभनों में ना आकर अपने मत का सही उपयोग करें, क्योंकि सही सोच ही देश की प्रगति को बेहतर दिशा देती है।