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Sunday 19th of May 2019
स्वास्थ्य

अस्थमा नहीं है लाइलाज, इनहेलेशन थैरेपी है कारगर

Friday, May 03, 2019 13:15 PM
अस्थमा एक क्रोनिक (दीर्घावधि) बीमारी है

जयपुर। अस्थमा एक क्रोनिक (दीर्घावधि) बीमारी है जिसमें श्वास मार्ग में सूजन और श्वास मार्ग की संकीर्णता की समस्या होती है जो समय के साथ कम ज्यादा होती है। बच्चों में अस्थमा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। डॉक्टर्स का मानना है कि वे बच्चों में अस्थमा के 25-30 नए मामले हर महीने देखते हैं। पिछले एक वर्ष में अस्थमा के पीड़ित मरीजों की संख्या में औसतन पांच फीसदी बढ़ोतरी देखी गई है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इन्हेलेशन थेरेपी लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन करीब 20 फीसदी अस्थमा पीड़ित किशोरावस्था से पहले ही या किशोरावस्था के दौरान इन्हेलर का उपयोग बंद कर देते हैं। अस्थमा के प्रमुख कारणों में वायु प्रदूषण से लेकर एयर पार्टिकुलेट मैटर्स का बढ़ना, धूम्रपान, बचपन में सही उपचार नहीं होना, मौसम में बदलाव जिसकी वजह से कॉमन फ्लू जैसा वायरल इन्फेक्शन होना और सबसे बड़ी बात मरीजों में इसके प्रति भारी अनदेखी हैं।

इनहेलेशन के प्रति भ्रांति दूर होना जरूरी
जेके लोन हॉस्पिटल के प्रोफेसर एंड यूनिट हैड पल्मोनरी डिजीज डॉ. बी एस शर्मा और फोर्टिस अस्पताल के इंचार्ज पल्मोनरी विभाग डॉ. अंकित बंसल ने बताया कि इनहलेशन थेरेपी के प्रति लोगों की धारणा बदलना बेहद जरूरी है। इन्हेलेशन थेरेपी लोगों के जीवन पर अस्थमा का प्रभाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, इसलिए इसका अनुपालन महत्वपूर्ण है। सांस के माध्यम से औषधिया लेने से वे सीधी फेफड़ों में पहुंचतीं हैं।

लेकिन इसका असर तभी होगा जब मरीज अपने डॉक्टर के साथ सहयोग करे और बताई गई विधि के अनुसार उपचार का प्रयोग करे। इस स्थिति के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि भारत में मरीज बीच में ही इनहलेशन थेरेपी बंद कर देते हैं जिसके कारण रोग पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।