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Thursday 17th of October 2019
स्वास्थ्य

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बचाती है मैमोग्राफी स्क्रीनिंग

Friday, May 03, 2019 16:20 PM
शैल्बी हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉ. कपिल देव श्योरन

जयपुर। भारत में हर साल करीब डेढ़ लाख महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है। अगर एक उम्र के बाद रूटीन चेकअप कराया जाए तो ब्रेस्ट कैंसर के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए मैमोग्राफी की जाती है जो अब लगभग सभी जगह उपलब्ध है। एक अनुभवी विशेषज्ञ से अपनी जांच के बारे में परामर्श लेकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
क्या होता है मैमोग्राफी
शैल्बी हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉ. कपिल देव श्योरन ने बताया कि मैमोग्राफी टेस्ट ब्रेस्ट का एक्सरे होता है और ब्रेस्ट कैंसर को पहचानने का काफी कारगर तरीका है। महिलाओं को सामान्यत: 40 साल की उम्र के बाद या कुछ समय पहले से ही नियमित रूप से हर साल मैमोग्राफी टेस्ट कराना चाहिए। यदि परिवार में स्तन कैंसर का पारिवारिक इतिहास है तो 40 की उम्र से पहले भी इसकी जांच करवाई जा सकती है।

गांठ की स्पष्ट स्थिति बताता है टेस्ट
अगर स्तन में किसी तरह की गांठ बन रही है तो उसकी स्पष्ट स्थिति का पता लगाने में यह मैमोग्राफी की जांच बहुत काम आती है। डॉ. कपिलदेव ने बताया कि मैमोग्राफी के द्वारा मिली तस्वीरों से स्तन में गांठ या कैल्शियम के जमाव को खोजने में मदद मिलती है। वैसे अधिकांश गांठें कैंसर की नहीं होती हैं।

अब 3डी मैमोग्राफी
कैंसर सर्जन डॉ कपिलदेव ने बताया कि, अब 3डी मैमोग्राफी भी होने लगी हैं जिसके द्वारा ली जाने वाली तस्वीरों से ब्रेस्ट में मौजूद छोटी से छोटी गांठों का भी पता लगाया जा सकता है। इससे पहले ब्रेस्ट में अगर कोई गांठ महसूस हो रही हो तो महिला स्वयं स्तन परीक्षण से भी उसकी जांच कर सकती हैं। अगर गांठ, त्वचा में लचीलापन या आकार में परिवर्तन महसूस हो रहा हो तो तुरंत विशेष से संपर्क कर इसकी जांच करानी चाहिए