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Thursday 17th of October 2019
स्वास्थ्य

हीमोफीलिया के इलाज में मददगार है ये थैरेपी

Wednesday, April 17, 2019 11:40 AM
कांसेप्ट फोटो

जयपुर। हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को सामान्य जीवन जीने में मदद करने में जल्दी जांच, उपचार तक पहुंच और फिजियोथेरेपी का अहम योगदान है। फैक्टर रिप्लेसमेंट थैरेपी तक आसान पहुंच और फिजियोथैरेपी के जरिए हीमोफीलिया के मरीज विशेष रूप से बच्चे खून से संबंधित इस जानलेवा बीमारी से लड़ सकते हैं।

आधारभूत जानकारी की कमी और हीमोफीलिया का इलाज नहीं हो पाने के कारण जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। चिकित्सकों ने सरकारी केंद्रों पर जांच की सुविधा, फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और फिजियोथेरेपी तक पहुंच सुनिश्चित करने में सरकार के सहयोग पर भी जोर दिया है। हीमोफीलिया फेडरेशन (इंडिया) के मुताबिक भारत में हीमोफीलिया के 20 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड मरीज हैं। हालांकि भारत की आबादी को देखते हुए अनुमान है कि यह संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय
जेके लोन हॉस्पिटल जयपुर के मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट (पेडिअट्रिशन) डॉ. गोविन्द गुप्ता ने बताया कि पर्याप्त फिजियोथेरेपी की भी यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका रहती है कि ऐसे बच्चे सक्रिय और स्वस्थ बने रहें। समाज और सरकार को खून से जुड़ी इस बीमारी से लड़ने की दिशा में हाथ मिलाने की जरूरत है। बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होने और पर्याप्त प्रबंध नहीं होने से यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। हीमोफीलिया का इलाज जरूरत के अनुरूप फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी से किया जा सकता है। खून का थक्का जमाने वाले फैक्टर के प्रोफिलैक्टिक इंफ्यूजन के जरिए खून के असामान्य बहाव को रोका जा सकता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और बीमारी की जांच के लिए सरकारी केंद्र उपलब्ध हैं, लेकिन देश में इसको लेकर पर्याप्त जागरुकता नहीं है।

हीमोफीलिया क्या है? 
हीमोफीलिया खून से जुड़ा एक आनुवांशिक जेनेटिक विकार है, जिसमें शरीर में खून का थक्का जमाने की क्षमता खत्म हो जाती है। इस दुर्लभ बीमारी के शिकार व्यक्ति में खून सामान्य लोगों की तुलना में तेजी से नहीं बहता है, लेकिन ज्यादा देर तक बहता रहता है। उनके खून में थक्का जमाने वाले कारक (क्लोटिंग फैक्टर) पर्याप्त नहीं होते हैं। क्लोटिंग फैक्टर खून में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो चोट लगने की स्थिति में खून को बहने से रोकता है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें ज्यादा खून बहने के कारण मरीज की जान भी जा सकती है।