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Thursday 20th of June 2019
शिक्षा जगत

राजस्थान 10वीं बोर्ड में भी बेटियों का दबदबा

Tuesday, June 04, 2019 10:20 AM
शीला, कल्पना और अभिजीत (फाइल फोटो)

जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर की ओर से आयोजित सैकण्डरी परीक्षा के परिणाम में एक बार फिर बेटियां का दबदबा रहा।  शिक्षा राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने सोमवार को दसवीं बोर्ड का परिणाम घोषित किया। परिणाम 79.85 प्रतिशत रहा, जिसमें छात्राओं का नतीजा 80.35 फीसदी और छात्रों का 79.45 प्रतिशत रहा। परीक्षा में इस वर्ष 11 लाख 22 हजार 495 विद्यार्थियों को पंजीकृत किया गया था, जिसमें से 10 लाख 98 हजार 132 परीक्षार्थी शामिल हुए और 8 लाख 76 हजार 848 उत्तीर्ण हुए। इनमें से 6 लाख 12 हजार 77 छात्रों ने परीक्षा दी और 4 लाख 86 हजार 279 सफल हुए। वहीं, 4 लाख 86 हजार 55 छात्राएं परीक्षा में बैठी, जिनमें से 3 लाख 90 हजार 569 उत्तीर्ण हुर्इं। गत वर्ष सैकण्डरी परीक्षा का परिणाम 79.86 प्रतिशत रहा था। उल्लेखनीय है कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सीनियर सैकण्डरी के सभी संकाय और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं तथा 12वीं के सभी संकायों में भी बेटियों ने ही बाजी मारी थी।

किस श्रेणी में कितने पास
उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में 3 लाख 37 हजार 78 प्रथम श्रेणी में, 4 लाख 6 हजार 61 द्वितीय श्रेणी में और 1 लाख 33 हजार 350 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में और 359 केवल उर्त्तीण हुए हैं। जबकि 81 हजार 22 परीक्षार्थियों को पूरक परीक्षा के योग्य घोषित किया गया। छात्रों में प्रथम श्रेणी में 1 लाख 80 हजार 697, द्वितीय श्रेणी में 2 लाख 25 हजार 855, तृतीय श्रेणी में 80 हजार 2 उत्तीर्ण हुए। छात्राओं में 1 लाख 56 हजार 881 प्रथम श्रेणी में, 1 लाख 80 हजार 206 द्वितीय श्रेणी में तथा 53 हजार 348 छात्राएं तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुई हैं। 43 हजार 638 छात्र तथा 37 हजार 384 छात्राएं पूरक परीक्षा के योग्य घोषित की गई हैं।

नियमित परीक्षार्थी आगे रहे
परीक्षा में प्राइवेट परीक्षार्थी नियमित परीक्षार्थियों की तुलना में बहुत पीछे रह गए। नियमित परीक्षार्थियों का परीक्षा परिणाम जहां 80.07 प्रतिशत परिणाम रहा, वहीं प्राइवेट का परिणाम मात्र 14.85 फीसदी रहा। नियमित परीक्षार्थी के रूप में 10 लाख 94 हजार 456 विद्यार्थी प्रविष्ठ हुए, जिनमें से 8 लाख 76 हजार 302 परीक्षार्थी पास हुए। जबकि प्राइवेट में 3 हजार 676 में से केवल 546 ही उत्तीर्ण हो सके।