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Thursday 19th of September 2019
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नई तकनीकों से संभव है ब्रेन ट्यूमर का इलाज

Saturday, June 08, 2019 11:45 AM
कांसेप्ट फोटो

जयपुर। 30 साल के हुलासमल और 50 साल की यशोदा को जब पता चला कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है तो मानों उनकी जिंदगी जैसे थम सी गई थी। जबकि नई तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर का ईलाज संभव है और व्यक्ति जिंदगी पहले की तरह ही जी सकता है। वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे के मौके पर नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पीटल में इलाज से पूरी तरह ठीक हो चुके कुछ मरीजों ने अपनी कहानी, अपनी जुबानी बयां कर लोगों को बताया कि ब्रेन ट्यूमर होने का मतलब यह नहीं कि जिंदगी खत्म, इसका इलाज संभव है और बाकी की जिंदगी खुशहाल जी सकते हैं।

लगा कि कभी बोल नहीं पाऊंगा
बीकानेर के तीस वर्षीय हुलासमल जांगिड़ के ब्रेन में स्पीच वाले एरिया में ट्यूमर था। जानकारों की सलाह पर सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. के के बंसल के पास आया तो हौसला बंधा। डॉ. बंसल ने उसकी स्थिति देखते हुए उसे बिना बेहोश किए अवेक ब्रेन ट्यूमर सर्जरी की ताकि स्पीच वाले भाग को नुकसान न हो। ट्यूमर निकल गया और अब जिंदगी फिर से खुशियों से भर गई है।

हाथ पैरों में सुन्नपन था, निकला ट्यूमर
अजमेर की 50 वर्षीय गृहणी यशोदा ने बताया कि मुझे हाथ पैरों में अजीब सुन्नपन और आंखें स्थिर रहने की शिकायत थी। जांच कराई तो ब्रेन ट्यूमर सामने आया। सुनकर पैरों तले से जमीन खिसक गई कि अब बच्चों को कैसे पाल पाउंगी। मगर तीन साल पहले यहां सर्जरी कराई और आज तक कोई परेशानी नहीं हुई, घर का सारा काम पहले की तरह कर पा रही हूं।

नारायणा हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन डॉ. केके बंसल ब्रेन ट्यूमर क्यों होते हैं इसका वास्तविक कारण तो अभी तक पता नहीं चला है, मगर इससे बचाव हो सकता है। पूरी नींद लें, मोबाइल फोन स्क्रीन से जितना हो सके दूर रहें, रेडिएशन वाले क्षेत्र से दूरी बनाएं, खानपान संतुलित रखें, तनाव से दूर रहें। अत्याधिक तकनीकों ने इसका इलाज संभव कर दिया है।

सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. कृष्णहरि शर्मा का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर से अब डरने की जरूरत नहीं है। अब पूरा ब्रेन खोले बिना ही एंडोस्कॉपिक व माइक्रोस्कॉपिक तकनीक से ऑपरेशन किए जा रहे हैं। भविष्य में जेनेटिक इंजनियरिंग विकसित होने पर ब्रेन में ट्यूमर बढ़ने को भी रोका जा सकेगा।