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Sunday 21st of July 2019
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जयपुर का परकोटा हर कोई देखता ही रह जाता है

Sunday, July 07, 2019 10:50 AM
जयपुर का ऐतिहासिक हवामहल

जयपुर। करीब 300 साल पहले जयपुर शहर की स्थापना की गई। लंबी चौड़ी और ऊंची प्राचीरों से घिरे इस नगर में प्रवेश कीजिए तो पहली झांकी से ही लगता है जैसे अरावली पर्वतमाला में कैनवास पर किसी सिद्धहस्त कलाकार ने अपनी तूलिका से यह दृश्यांकन किया है। ऊंचे मंदिरों और झुके हुए झरोखों, महलों का नगर, मुख्य द्वारों और सुरम्य उद्यानों का नगर रंग बिरंगे परिधानों से सुशोभित नर नारियों का नगर, आधुनिकता और मध्ययुगीय तौर तरीकों वाला एक विचित्र विरोधाभास से भरा नगर है। जयपुर की रचना में आधुनिक कोण है तो स्थापत्य में क्लासीकल गोलाइयां या वृत भी हैं। देश के स्वाधीन होने के पहले जयपुर अपनी सांस्कृतिक, स्थापत्य और बौद्धक विरासत के कारण तत्कालीन राजपूताना प्रदेश में अग्रणी था।

जयपुर शहर जिस माप पैमाने और ढर्रे पर सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 में बसाया था वह आज भी बड़े बड़े नगर नियोजकों के मन को मोह लेता है। नक्शा ही कुछ ऐसा बना कि पहले बार में ही यहां आने वाला इस परकोटे से घिरे शहर को देखकर एक नजर में ही मोहित हो जाता है और यहां के चौड़े सपाट, हाट बाजारों, नाक की सीध, एक दूसरे के आर पार जाने वाले रास्तों, गलियों, शहर की प्राकृतिक पृष्ठभूमि बनाने वाली पहाडियों और स्थापत्य तथा रंग की एक रूपता को देखकर वाह वाह कह उठता है। जयपुर के अद्भुत नगर नियोजन की ख्याति तो इसकी स्थापना के बीस-तीस साल बाद ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और उस वक्त जो भी यूरोपीय और विदेशी सैलानी लेखक यहां आए तो इस शहर को संसार के सर्व सुंदर शहरों में से एक बताया।

निर्माण में लगे थे चार साल
इतिहासकारो के अनुसार यह देश का पहला पूरी योजना से बनाया गया शहर था और स्थापना के समय राजा जयसिंह ने अपनी राजधानी आमेर में बढ़ती आबादी और पानी की समस्या को ध्यान में रखकर ही इसका विकास किया था। नगर के निर्माण का काम 1727 में शुरू हुआ और प्रमुख स्थानों के बनने में करीब चार साल लगे। यह शहर नौ खंडों में विभाजित किया गया था, जिसमें दो खंडों में राजकीय इमारतें और राजमहलों को बसाया गया था। प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्र के आधार पर निर्मित इस नगर के प्रमुख वास्तुविद थे एक बंगाली ब्राह्मण विद्याधर चक्रवर्ती जो आमेर दरबार की कचहरी मुस्तफीश् में आरम्भ में महज एक नायब दरोगा लेखा लिपिक थे, पर उनकी वास्तुकला में गहरी दिलचस्पी और असाधारण योग्यता से प्रभावित हो कर महाराजा ने उन्हें नयी राजधानी के लिए नए नगर की योजना बनाने का निर्देश दिया। यह शहर प्रारंभ से ही गुलाबी नगर नहीं था बल्कि अन्य सामान्य नगरों की ही तरह था, लेकिन 1876 में जब वेल्स के राजकुमार आए तो महाराजा रामसिंह द्वितीय के आदेश से पूरे शहर को गुलाबी रंग से जादुई आकर्षण प्रदान करने की कोशिश की गई थी। उसी के बाद से यह शहर गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। सुंदर भवनों के आकर्षक स्थापत्य वाले, दो सौ वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले जयपुर में जलमहल, जंतर-मंतर, आमेर महल, नाहरगढ़ का किला, हवामहल और आमेर का किला राजपूतों के वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने हैं।

तीन ओर से अरावली पर्वत माला से घिरा
जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण, परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहां के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है जो यहां के स्थापत्य की खूबी है। जयपुर भारत के टूरिस्ट सर्किट गोल्डन ट्रायंगल का हिस्सा भी है। इस गोल्डन ट्रायंगल में दिल्ली, आगरा और जयपुर आते हैं भारत के मानचित्र में उनकी स्थिति अर्थात लोकेशन को देखने पर यह एक त्रिभुज का आकार लेते हैं। इस कारण इन्हें भारत का स्वर्णिम त्रिभुज इंडियन गोल्डन ट्रायंगल कहते हैं। शहर चारों ओर से दीवारों और परकोटों से घिरा हुआ है जिसमें प्रवेश के लिए सात दरवाजे हैं। बाद में एक और द्वार भी बना जो न्यू गेट कहलाया। पूरा शहर करीब छह भागों में बंटा है।

विश्व पटल पर सम्मान : राज्यवर्धन
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद जयपुर ग्रामीण कर्नल राज्यवर्धन ने जयपुर को विश्व विरासत का दर्जा दिए जाने पर यूनेस्को का आभार जताया है। उन्होंने कहा जयपुर के गौरव को विश्व पटल पर जो सम्मान मिला है, उससे आज जयपुर की ऐतिहासिक शान में एक और अध्याय जुड़ गया है। मुझे गर्व एवं हर्ष है कि यूनेस्को ने जयपुर को विश्व विरासत का दर्जा दिया है। एक शहर जिसने देश का राजा-रानियों की कहानियां दी है, खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतें दी है, मेहमान नवाजी की मिसालें दी है, वीरों की शौर्य गाथाएं दी है, आज उस शहर ने देश को गर्व करने का एक और बेहतरीन मौका दिया है। यहां के धार्मिक स्थलों और प्राचीन स्मारकों के कारण यह हमेशा से ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है। जयपुर को विश्व विरासत का दर्जा मिलने के कारण पर्यटन की दृष्टि से और आकर्षण बढ़ेगा, जिससे रोजगार को बढ़ावा तो मिलेगा ही साथ ही राजस्व में भी वृद्धि होगी। जयपुर के लिए आज का दिन गौरवशाली है।

1998 में प्रयास शुरू : धारीवाल
नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि जयपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में दर्जा दिलाने के लिए वर्ष 1998-2003 में हमारी सरकार के दौरान यह कोशिश प्रारम्भ की थी। उस दौरान विरासत संरक्षण के लिए चारदीवारी के भीतर बाजारों के अतिक्रमण हटाकर उनकी मरम्मत एवं गुलाबीकरण करवाया गया। जयपुर शहर (परकोटा)  को यूनेस्को की ओर से विश्व विरासत सूची में शामिल करने पर धारीवाल ने जयपुर शहर के नागरिकों को बधाई दी है।  जयपुर शहर के नागरिक जयपुर शहर के हैरिटेज स्वरूप को बनाए रखना चाहते हैं, यह यहां की संस्कृति भी है। वर्ष 2008 से 2013 तक हमने यूनेस्को से संपर्क कर उन्हें जयपुर शहर को हैरिटेज सिटी दर्जा दिए जाने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजे तथा उन्होंने जो दिशा-निर्देश दिए उसके अनुरूप चारदीवारी के स्वरूप को निखारा। हाल ही में एक बार फिर से यूनेस्को टीम भेजी एवं वहां पर जयपुर शहर चारदीवारी के संबंध में प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण दिया।

धारीवाल ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति हमारे देश मे घूमने आएगा तो पहले वह यह देखेगा कि भारत का कौन-कौनसा शहर वर्ल्ड हैरिटेज सिटी में शामिल है। इससे हमारे शहर जयपुर के पर्यटन एवं व्यापार को लाभ होगा तथा विश्व में जयपुर की साख बढ़ेगी। धारीवाल ने नगर निगम, जयपुर विकास प्राधिकरण, पर्यटन विभाग एवं जयपुर शहर के नागरिकों को बधाई दी है। इस अवसर पर नगर निगम के महापौर विष्णु लाटा ने धारीवाल के निवास स्थान पर पहुंच कर उन्हें बधाई दी तथा पुष्प गुच्छ भेंज कर उन्हे मिठाई खिलाई।

रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी और विधायक अमीन कागजी ने जयपुरवासियों और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। जोशी और कागजी ने कहा कि विश्व धरोहर में शामिल किए जाने से दुनिया के नक्शे पर जयपुर कि प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ी है। विश्व धरोहर बनाए जाने से जयपुर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे जयपुर में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। इससे जयपुर का सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी और बढ़ेगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से धरोहर को संवारने व विकास के अन्य कार्य करवाए जाने लिए आसान शर्तों पर ऋण हासिल करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा जोशी और कागजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और जयपुर विश्व धरोहर के लिए बनी राज्य स्तरीय कमेटी के सदस्यों को जयपुर वासियों की ओर हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में कमेटी के सार्थक प्रयासों से जयपुर को यह सफलता मिल पाई है।

शहर को मिलेगी नई पहचान : लाटा
नगर निगम के महापौर विष्णु लाटा ने बताया कि जयपुर शहर के परकोटे को विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने से शहर को नई पहचान मिलेगी। यह अकेले नगर निगम की उपलब्धि नहीं बल्कि नगर निगम की टीम के साथ ही अन्य विभागों एवं राज्य सरकार के सकारात्मक योगदान एवं आमजन के सहयोग के बिना संभव नहीं था। इस सूची में जयपुर को विश्व पटल पर एक नई पहचान मिली है, जिससे पर्यटन के साथ आधारभूत संरचना के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रगति मिलेगी। इसके लिए सभी शहरवासियों को हार्दिक बधाई। पिछले महीने पेरिस में आयोजित बैठक के दौरान जयपुर शहर को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने के लिए जयपुर नगर निगम की टीम ने मजबूती से अपना पक्ष रखा था और जो खामियां बैठक के दौरान सामने आई उनको हमने दूर कर एक सप्ताह में दुबारा से प्रस्ताव भेज दिया।

विश्व में नई पहचान : बोहरा
जयपुर सांसद रामचरण बोहरा ने कहा कि जयपुर के विश्व प्रसिद्ध परकोटे को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से जयपुर की संस्कृति, पर्यटन, प्राचीन स्मारकों की स्थापत्य कला को विश्व में एक नई पहचान मिलेगी। जयपुर प्रारंभ से ही विश्व में छोटी काशी के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं प्राचीन स्मारकों के कारण यह देश ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है, लेकिन विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से इसे और नई पहचान मिलेगी तथा पर्यटकों के आकर्षित होने से रोजगार व राजस्व में भी वृद्धि होगी, निश्चित रूप से यह जयपुर के लिए गौरवमय दिन है।

छह गांवों से मिलकर बसाया था जयपुर
यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल आज का जयपुर को छह गांवों को मिलाकर बसाया गया था। ये गांव थे जयपुर नाहरगढ़, तालकटोरा, संतोष सागर, मोतीकटला, गलताजी और किशनपोल, जो वास्तुशिल्प के लिए विश्वविख्यात है। इसकी चौड़ी चौड़ी सड़कें, महल और इमारतों का वैभव पुरातन और नवीनता की कहानी बयां करता है। शहर में प्रवेश के लिए सात द्वार बनाए गए थे। यह शहर चारों ओर से दीवारों से घिरा है। शहर के बीचों बीच राजा का महल सिटी पैलेस के नाम से मशहूर है। इसके अलावा जंतर मंतर और हवा महल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

सिटी पैलेस के उत्तर में एक झील तालकटोरा हुआ करती थी। इस झील के उत्तर में एक और झील थी जो बाद में राजामल का तालाब कहलाई। सिटी पैलेस के पूर्वोत्तर में और लगभग दो किलोमीटर दूर एक बड़ा भू-भाग दलदल था, जहां से नदी और नालों का पानी आता था। जयपुर शहर को बसाते समय सड़कों और विभिन्न रास्तों की चौड़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया। शहर के मुख्य बाजार त्रिपोलिया बाजार में सड़क की चौड़ाई 107 फीट और हवामहल के पास 104 फीट की सड़क बनाई गई। जौहरी बाजार की दुकानों के बरामदे से जौहरी बाजार की चौड़ाई 92 फीट रखी गई। वहीं जब चांदपोल बाजार बना तो दुकानों के बरामदे से चौड़ाई 91 फीट रखी गई। जौहरी बाजार के भवन सबसे सुन्दर और एकरूपता लिए हुए आज भी दिखते हैं। चांदपोल से सूरजपोल गेट पश्चिम से उत्तर की ओर है और यहां मुख्य सड़क दोनों द्वारों को जोड़ती है।