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Thursday 19th of September 2019
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जयपुर के सबसे प्रसिद्ध MI रोड पर ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या से बिगड़ते जा रहे हालात

Tuesday, September 03, 2019 16:55 PM
मिर्जा इस्माइल रोड पर रेंग-रेेंगकर चलता ट्रैफिक व गंदगी के ढेर

जयपुर। शहर के मिर्जा स्माइल (MI Road) पर रोड पर अजमेरी गेट ट्रैफिक पॉइंट पर भारी जाम से राहगीरों को रेंग-रेंग कर चलना पड़ता है। अजमेरी गेट पर स्थित ट्रैफिक पॉइंट पर छोटे-बड़े भारी वाहनों की इस कदर आड़ी तेड़ी लाइन लग जाती है कि बड़े वाहनों को निकलने की जगह ही नहीं मिलती। हालत दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

प्रशासन ने एमआई रोड से अजमेरी गेट आने वाले वाहनों के लिए एकतरफा पार्किंग की व्यवस्था की है लेकिन शहर का ट्रैफिक लगातार बढ़ोतरी कर रहा है, इस तरफ ध्यान देना होगा। रेड लाइट पर कभी कभी वाहनों की रेलमपेल के बीच एक-दूसरे को निकलने की जगह नहीं मिलती। जल्दी निकलने के चक्कर में लोग रैड लाइट का भी ख्याल नहीं रखते। पांच बत्ती चौराहा, गणपति प्लाजा और आगे कलेक्ट्री सर्किल तक पर बिना हैलमेट लगाए निकलने वालों की फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है कोई ध्यान देने वाला होता है। ट्रैफिक कहां से कंट्रोल होगा।

मिर्जा इस्माइल रोड के बारे में कहा जाता है कि यह रोड शहर का ऐसा रोड है जहां पर विदेशों से सैलानी घूमने के लिए आते हैं और शहर की सुंदर छवि अपने मन में बसाकर जाते हैं। आज इस रोड की हर गली में अतिक्रमण इस कदर है कि आने वालों के हाथ पैर फूल जाएं। गलियों की वजह से रोड साइड रन करने वाले भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने इतना अच्छा विश्वप्रसिद्ध रोड होने के बावजूद पार्किंग के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए हैं जिसकी वजह से ग्राहक जो खरीददारी करने के लिए यहां आता है। ट्रैफिक जाम देखकर उसके हौंसले पस्त हो जाते हैं कभी कभी तो बिना खरीदारी के ही चले जाते हैं। शहर की सबसे प्रसिद्ध रोड के इस कदर बुरे हालात रहेंगे तो पर्यटक यहां आने से कतराएंगे।


इस तरह मिली थी जयपुर को मिर्जा स्माइल रोड

व्यापारियों ने कहा जैसा हमारे पूर्वक बताकर गए कि जयपुर पूरी तरह से बदल चुका था और सर मिर्जा को दूसरे घरानों से भी बुलावा आने लगा था। शहर के एक हिस्से में बंगलूरु पद्धति पर बड़े चैक के अन्तर्गत भवन बनाए गए थे। जिसके बीचों-बीच बड़े खम्भे में पांच लाइटें लगाई गईं। जिसके चलते इस चैक का नाम पांचबत्ती पड़ा जहां पर शहर के रईस रहते थे। उसके आस-पास की सड़क सर मिर्जा ने अपनी निगरानी में बनवाई थी। ऐसे में सवाई मानसिंह ने उन्हें जयपुर छोड़कर जाने से रोकने के लिए उसका नामकरण मिर्जा इस्माइल रोड एमआई रोड़ कर दिया। सर मिर्जा ने इस सड़क का नाम राजा मानसिंह के नाम पर एसएमएस हाइवे रखने का सुझाव दिया था मगर इसका नाम सर मिर्जा के नाम पर रखकर एक महाराजा ने उनके योगदान को सम्मानित किया था। हालांकि दरबारी मानसिकता से त्रस्त ठाकुरों और जागीरदारों ने एक दीवान के नाम पर किसी सड़क का नाम रखे जाने के महाराजा के फैसले का कड़ा विरोध भी जताया। अब चाहे कोई कुछ भी कहे मगर सर मिर्जा स्माइल के योगदान के सामने तो ये सम्मान भी कम ही था।


पार्किंग हो रही है अव्यवस्थित

एमआई रोड पर दो घंटे पार्किंग की व्यवस्था शुरु करने की हमारी प्रशासन से मांग है। अभी तक यह व्यवस्था शुरु नहीं हो पाई है। कई बार अधिकारियों से मिलकर पार्किंग शुरु कराने का आग्रह किया परन्तु अब कुछ नहीं हुआ। ग्राहको को सबसे बड़ी चिन्ता एमआई रोड पर अपने वाहन पार्क करने की रहती है। कई बार तो सिर्फ वाहन से ही घूमकर चले जाते हैं। उनका मन करता है खरीदारी करें मगर पार्किंग में जगह नहीं मिलती तो दिक्कते होती है। जहां पर कार पार्क होनी है वहां पर मोटरसाइकिले पार्क होती है और जहां पर मोटरसाइकिल पार्क होनी चाहिए वहां पर कार पार्क हो रही है इससे भी काफी असुविधा होती है। हरपाल सिंह पाली, अध्यक्ष, एमआई रोड व्यापार मंडल


मांगने वाले करते हैं परेशान
जयपुर हैरिटेज सिटी है इसलिए टूरिस्ट बहुत घूमने आता है। एमआई रोड़ पर रात्रि में दुकान के बाहर लगने वाली भीड़ को मांगने वाले चले आते हैं। बड़ों से लेकर छोटे छोटे बच्चे इस बोल बोलकर इस कदर मजबूर कर देते हैं कि इम्प्रेशन गलत जाता है। खरीदारी करने वालों का मन खट्टा हो जाता है सोचकर कि हमारे देश में आज भी गरीबी है। इस तरह की गतिविधियों को प्रशासन को रोकना चाहिए। यह जिम्मेदारी प्रशासन की है एक स्वच्छ माहौल के साथ स्वस्थ्य वातावरण भी आने वाले मेहमानों को उपलब्ध कराएं। सतीश लश्करी, चांदी व्यापारी


टॉयलेटस के इंतजाम नहीं
एमआई रोड इतना डवलप हो गया इसके बावजूद यहां पर लोगों के लिए टॉयलेटस की व्यवस्था नहीं है। प्रधानमंत्री का इतना महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट टॉयलेटस को लेकर चल रहा है। प्रशासन को कम से कम इतना तो सोचना चाहिए आने वालों को फ्रैश होने के इंतजाम तो किए जाए। नहीं तो वह अपने आप दूर भागेंगे। दुकानों के बाहर कचरा पड़ा रहता है। प्रशासन ने कचरे के बॉक्स लगवाएं वो भी उत्पाती चुराकर ले गए। दोबारा लगाकर समस्या को दूर कर दे ये भी नहीं होता है इसलिए यहां पर बहुत परेशानी होती है। भरत लश्करी, चांदी व्यापारी