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Thursday 20th of June 2019
ओपिनियन

जानिए राज काज में क्या है खास

Monday, June 03, 2019 10:55 AM

ये पब्लिक है...
संघ प्रमुख के एक संदेश ने भगवा वाले कई भाई लोगों की नींद उड़ा दी है। उड़े भी क्यों नहीं भाई साहब ने भी खरी-खरी सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मोहनजी ने सच्चा संदेश दे दिया कि ज्यादा इतराने की जरूरत नहीं है, आप तो केवल मोदी नाम के कारण ही जीते हैं, वरना असलियत तो आपको भी पता है। अब मोदीजी की तर्ज पर त्याग और समर्पण से सेवा करेंगे, न कि घर भरने लगेंगे। भागवतजी के इस संदेश के पीछे मंशा का तो पता नहीं, लेकिन भारती भवन में सन् 1974 में बनी रोटी फिल्म का गाना गुनगुनाने वालों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। राजेशजी और मुमताजजी पर फिल्माए गए इस गाने के बोल हैं- ये पब्लिक है, ये सब जानती है।

खोज मोदी टीम की
बेस्ट मोदी टीम के लिए सूबे में भी अफसरों की तलाश जारी है। पीएमओ में वर्कर की हैसियत से रहने वाली इस टीम में खादी के साथ करीब दो दर्जन खाकी वालों को भी मौका मिलने की चर्चाओं ने कइयों के मन में लड्डू  फूटने लगे हैं। सूबे से कम से कम दो अफसरों की तलाश है। इस काम में जुटे हेल्परों ने अपने स्तर खाकी वालों का बैकग्राउण्ड सूंघ रहे हैं। पीएचक्यू में सुगबुगाहट है कि बेदाग अफसरों की सूची ज्यादा लंबी नहीं है, सो सूंघने वालों को ज्यादा जोर नहीं आएगा।

चर्चा में एक कमरा
सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के भवन में बना एक कमरा काफी चर्चा में है। 241 नंबर का यह कमरा दूसरे माले पर है और अभी उसमें राज के एक रत्न की कुर्सी है। इस कमरे में पहले भी कई लोग बैठ चुके हैं। पूर्ववर्ती राज में हाथी की सवारी कर पंजे से हाथ मिलाने वाले दोनों मीनेश वंशज भी बैठ चुके हैं, लेकिन उनका स्वाद कड़वा ही रहा। गुजरे जमाने में पानी का महकमा संभाल चुके लूणी वाले विश्नोई भाईसाहब बैठा करते थे। उसके बाद राज का काज करने वाले चित्तौड़ा और रोहितजी फिर राठौड़ साहब की भी नाम पट्टिकाएं लग चुकी है। लेकिन ये सभी लोग कुर्सी पर ज्यादा दिन नहीं टिक सके। अब एक रत्न की पट्टिका लगी है। कमरे का इतिहास सुनने के बाद भाईसाहब अभी से ही दुबले हो रहे हैं। कमरा बदलने के लिए जोशी के दरबार में हाजरी लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

रोड़ा बना बैकग्राउण्ड
नमो टीम टू में सूबे के खिलाड़ियों की कमी को लेकर तीन दिनों से चर्चा जोरों पर है। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी ठिकाने के साथ ही सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में भी काफी खुसरफुसर है। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनो में बतियाते हैं कि दूसरी बार भी मिशन-25 पूरा करने के बाद भी सूबे की जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने के पीछे कोई न कोई बड़ा कारण छिपा है। भारती भवन में भी बैठकों में चिंतन-मंथन हो रहा है कि बैकग्राउण्ड ही सबसे बड़ा रोड़ा बना है। टीम बनाने से पहले मंगाए गए बॉयोडेटाज में अधिकांश एमपीज का संघ या पार्टी से पुराने नाता वाला कॉलम खाली है। और जो वरिष्ठ हैं, उनके ऊपर परिवारवाद को लेबल लगा हुआ है। भाई लोगों में चर्चा तो यहां तक भी है कि अब रिशफलिंग के पहले भी सूची दिल्ली तक कई हाथों से गुजरेगी।

नहीं निकला अमृत
इंदिरा गांधी भवन में बुध को मंथन करने में खादी वालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। कइयों ने एक-दूसरे की तरफ बाहें भी चढ़ाई। ग्रासरूटर और पैराशूटर को लेकर भी मुंह खुले। जोधपुर वाले जादूगर के साथ छोटे पायलट को लेकर भी आंखें लाल हुई। कुछ भाई लोग तो गला फाड़-फाड़ बोले कि पूर्वी राजस्थान में एक जाति विशेष का वोट बैंक खिंचकने के भी कई मायने हैं। जब लीडरशिप ही जाति के नाम पर हो, तो फिर जंग जीतने की आस लगाना ही मुंगेरीलाल के सपनों से कम नहीं है। अगर लीडर पार्टी की होती, तो यह दिन तो नहीं देखने पड़ते। यह सुन दिल्ली वाले पाण्डेजी भी अविनाश होकर बगलें झांकते रहे। एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने के बाद बिना अमृत के ही मंथन बंद कर सब अपने-अपने घरों को लौट गए। सालों से पीसीसी की चौखट पर आने वाले बुजुर्गवार की पीड़ा है कि नए छोकरों के सहारे चलेंगे, तो ठोकर तो खानी है। सो ठुकराए भी तो ऐसे कि 70 साल की सारी हैकड़ी निकल गई।

- एल.एल शर्मा