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Monday 14th of October 2019
ओपिनियन

पढ़ें राज-काज में क्या है खास

Wednesday, June 26, 2019 11:15 AM

सरदार पटेल मार्ग पर बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर अब शांति है। मंथन की आड़ में अपनी भड़ास निकाल कर धोती वाले भाई लोग अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं। ठिकाने पर अब ठाले-बैठे लोगों के साथ बन्नाजी ही नजर आते हैं। ठिकाने में शांति है, तो बंगला नंबर 13 में पूर्ण शांति है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि मैडम के राज की कई योजनाओं पर चिंतन-मंथन हो रहा है, तो कुछेक के ब्रेक लग चुके हैं। और तो और पहले वाले राज के कई फैसले तक बदले जा रहे हैं, फिर भी मैडम मुंह तक नहीं खोल रही, चूंकि उनके बंगले में पूर्ण शांति है।

तरीका मुर्दे हल्के करने का
सचिवालय में इन दिनों एक शगूफा बहुत ही तेज गति से दौड़ रहा है। शगूफा भी नए सिस्टम को लेकर है। राज का काज करने वालों में खुसरफुसर है कि आखिर वो कौन है, जो राज को उल्टी सीधी सलाह दे रहे हैं। लंच केबिनों में चर्चा है कि कुछ साहब लोगों ने राय दी है कि सिस्टम को डवलप करे, तो भाग-भाग कर काम करने में कोई परेशानी नहीं होगी और रिजल्ट भी जल्द मिलेगा। ऊपर वालों के सलाह जंचने में भी कोई देरी नहीं हुई, सो फरमान भी जारी हो गया। राज का काज करने वालों ने सबसे पहले नए सिस्टम को चौथे स्तंभ पर यूज किया है। राज के हुकुम की आड़ लेकर ऐसे खबरनवीसों की सूची भी बनाई जा रही है, जिनकी लेखनी कुछ ज्यादा ही खांटी है। अब राज का काज करने वालों को कौन समझाएं कि सिर के बाल काटने से मुर्दे हल्के नहीं होते हैं। अब तो सोशल मीडिया से भी सरकारें आने-जाने लगी है।

आधी समस्या की जड़
कहावत है कि नीचे पटवार और ऊपर करतार। इन दोनों की किसी पर मेहरबानी हो जाए, तो छप्पर फाड़ कर ही मिलता है। बीकाजी की धरा पर धोती वाले रत्न के सामने जब मामला आया तो वो भी हंसे बिना नहीं रह सके। चौपाल पर एक गांव वाले ने मुंह खोला तो, साहब लोग भी दंग रह गए। बोलने वाले ने भी आगा देखा ना पीछा सोचा। राज के बड़े साहब की मौजूदगी में सलाह दे दी कि एसी कमरों में बैठ कर प्लान बनाने से सूबे का विकास नहीं होगा। अगर प्रत्येक गांव में एक पटवारी एक मास्टर, एक ग्राम सेवक और एक नर्स की तैनाती हो तो आधी समस्याएं तो स्वत: ही स्वाहा हो जाएगी।

सावन में मनेगी दीवाली
जोधपुर वाले भाईसाहब ने अपनी टीम में बढ़ोतरी करने का मानस क्या बनाया, कइयों ने शिवजी के दूध चढ़ाना शुरू कर दिया। और तो और अपनी धर्म की पत्नियों से भी सोमवार के व्रत के लिए हाथ-पैर जोड़ लिए। सावन से पहले कइयों के घर दीवाली के दीये जलने वाले हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर चर्चा है कि अबकी बार कइयों के अच्छे दिन आने वाले हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा भी ना होगा। जो चर्चा में है, वो चर्चा तक ही सीमित रहेंगे। कई महीनों से जगरता करती आ रही चौकड़ी का मंगल अभी ठीक नहीं है, चूंकि वायदा अच्छे दिन आने के किए गए थे, अच्छी रातों के नहीं।

एक जुमला यह भी
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि राज के मेम्बरान को लेकर है। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर चर्चा है कि विधानसभा चुनावों में बड़े अरमानों के साथ जंग जीत कर आए एमएलएज की कोई कदर नहीं है। उनके चेहरों पर चिन्ता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। चर्चा है कि उनकी न तो ब्यूरोक्रेसी में सुनवाई हो रही है और न ही दरबारों में कोई हालचाल पूछता है। और तो और उनके रिश्तेदारों के काम करवाने के लिए पसीने बहाने पड़ रहे हैं। अब उनको कौन समझाए कि चक्की के दोनों पाटों के बीच में बचा गेहूं पिसे बिना नहीं रहता।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)