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Thursday 17th of October 2019
उदयपुर

प्रदेश में 240 करोड़ लागत के स्कूली कमरों में भरा कबाड़

Tuesday, October 08, 2019 22:25 PM
हजारों कमरों भरा कबाड़

उदयपुर। राज्य सरकार व भामाशाहों ने सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत कमरों का तो निर्माण करा दिया लेकिन उदयपुर संभाग सहित प्रदेश भर में 240 करोड़ रुपए की लागत से बने हजारों कमरों में आज कबाड़ भरा है। ऐसे में कमरे होने के बाद भी बच्चों को कहीं संयुक्त कक्षा में तो कहीं बरामदों में बिठाकर तालीम दी जा रही है। उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा, डंूगरपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, राजसमंद और उदयपुर जिलों में ऐसे कमरों की संख्या 4 हजार 211 है।
दूसरी ओर प्रदेश के 63 हजार सरकारी स्कूलों में 70 हजार से ज्यादा कमरों की कमी है फिर भी 24 हजार कमरे ऐसे हैं जिनमें कबाड़ भरा है। इनमें से अधिकांश स्कूलों में कक्षाएं बाहर खुले में चल रही हैं। इन स्कूलों में साइंस-कम्प्यूटर लैब का ताला चाहे साल में तीन-चार बार भी नहीं खुलता हो लेकिन कबाड़ भरे कमरों में टूटे सामान का ढेर रोज बढ़ता जा रहा है। कबाड़ में सिर्फ टूटा फर्नीचर ही नहीं, बल्कि लाखों की किताबें व अन्य सामान भी है। कबाड़ से छुटकारा पाने की सरकारी प्रक्रिया बोझल और पेचीदा है। इसके कारण संस्था प्रधान चाहकर भी कबाड़ हटवा नहीं सकते।
-किसी को नहीं कमरों की चिंता
सरकार भले ही मंत्री-विधायकों के आॅफिस और सरकारी निवासों की साज-सज्जा पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर देती है लेकिन स्कूलों की बदहाली किसी को नहीं दिखती। स्कूलों में जर्जर भवन, टूटे खिड़की-दरवाजे, उखड़ा फर्श की तस्वीरें आम हैं। ये हालात तब हैं, जब वर्ष 2018-19 में ही 121 भामाशाहों ने 150 करोड़ रुपए शिक्षा के लिए दान दिए हैं।
-यहां तो पांच कमरों में कबाड़
उदयपुर के मधुबन स्थित प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय परिसर के निचले हिस्से में बने पांच कमरों में गत पन्द्रह साल से कबाड़ भरा है। इससे कर्मचारियों के बैठने तक की जगह नहीं है। ऐसे में ऊपरी छोर पर बने हॉल में छह कार्यालयों का एक साथ संचालन किया जा रहा है। इससे एक-दूसरे का काम भी प्रभावित होता है।
यह है हाल
संभाग-इतने कमरों में कबाड़
जयपुर    4047
अजमेर    3853
भरतपुर    2714
कोटा    2585
उदयपुर    4211
जोधपुर    4316
बीकानेर    2445