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Thursday 19th of September 2019
राजस्थान

जैमर की जगह जेलों में तैनात हों प्रशिक्षित डॉग : न्यायमित्र

Thursday, May 16, 2019 10:55 AM

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के कल्याण से जुड़े मामले में न्यायमित्र की ओर से रिपोर्ट पेश की गई। अदालत ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश एनएस ढडढा की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने प्रदेश के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को कहा है कि वे जेल में मौत के मामले में लंबित जांच को पूरा करें। रिपोर्ट में न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल की ओर से अजमेर की सेन्ट्रल जेल और हाई सिक्योरिटी जेल व जोधपुर की सेन्ट्रल जेल और महिला जेल की निरीक्षण रिपोर्ट पेश की गई। इसके साथ ही न्यायमित्र की ओर से कहा गया कि अदालत की ओर से दिए कुछ दिशा-निर्देशों को तय समय में पूरा नहीं किया गया है। न्यायमित्र ने कहा कि जेलों में जैमर काम नहीं कर रहे हैं। यदि कम क्षमता का जैमर लगता है तो वह काम नहीं करता, वहीं यदि उच्च क्षमता का जैमर लगाया जाता है तो जेल परिसर के आसपास की आबादी को समस्या होती है। इसके अलावा जैमर लगाने की प्रक्रिया इतनी लंबी है कि जैमर लगने से पहले ही नई तकनीक आ जाती है।

यह दिए सुझाव
न्यायमित्र की ओर से सुझाव दिया गया कि जेलों में प्रशिक्षित डॉग तैनात करने के साथ ही डोर मेटल डिटेक्टर, एचएचएमडी डिटेक्टर और बैगेज स्कैनर आदि लगाए जाए। इसके अलावा जेलों में चालानी गार्डो के स्वीकृत पद भी वर्ष 1965 के बाद नहीं बढ़ाए हैं। इनकी कमी के चलते कैदियों को समय पर पेशी पर नहीं भेजा जाता। न्यायमित्र की ओर से कहा गया कि सात राज्यों में जेल परिसर के पास पेट्रोल पंप खोलकर कैदियों को रोजगार दिया गया है। प्रदेश में भी इस तरह की योजना अमल में लाई जा सकती है। जिससे कैदियों को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि जेल प्रशासन के पास आय का साधन में पैदा होगा।

जेल नियम लागू नहीं
न्यायमित्र की ओर से सुझाव दिया गया कि जेलों में प्रशिक्षित डॉग तैनात करने के साथ ही डोर मेटल डिटेक्टर, एचएचएमडी डिटेक्टर और बैगेज स्कैनर आदि लगाए जाए। इसके अलावा जेलों में चालानी गार्डो के स्वीकृत पद भी वर्ष 1965 के बाद नहीं बढ़ाए हैं। इनकी कमी के चलते कैदियों को समय पर पेशी पर नहीं भेजा जाता। न्यायमित्र की ओर से कहा गया कि सात राज्यों में जेल परिसर के पास पेट्रोल पंप खोलकर कैदियों को रोजगार दिया गया है। प्रदेश में भी इस तरह की योजना अमल में लाई जा सकती है। जिससे कैदियों को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि जेल प्रशासन के पास आय का साधन में पैदा होगा।