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Sunday 21st of July 2019
बिज़नेस

तंत्र में तरलता की कोई कमी नहीं : दास

Tuesday, July 09, 2019 12:15 PM

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि तंत्र में तरलता की कोई कमी नहीं है और इस विषय में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के सामने आ रही तरलता की समस्या को लगभग सुलझा लिया गया है। दास ने रिजर्व बैंक के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तंत्र में तरलता इस समय काफी ज्यादा है। गत एक जून से तंत्र में तरलता अधिक बनी हुई है। हम आकार और पुनर्भुगतान के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर देश के कुछ शीर्ष एनबीएफसी पर नजर रखे हुए हैं। सरकार ने भी बजट में कुछ उपायों की घोषणा की है। एनबीएफसी में तरलता की समस्या लगभग सुलझा ली गई है। पिछली दो तिमाहियों में आर्थिक सुस्ती के लिए एनबीएफसी में तरलता की कमी को काफी हद तक जिम्मेदार ठहराया गया है।

सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि एनबीएफसी की अच्छी परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए सरकारी बैंकों को वह दस प्रतिशत तक के नुकसान के लिए एकबार के लिए दस प्रतिशत आंशिक गारंटी देगी। सीतारमण ने पहले केंद्रीय बैंक के कार्यकारी बोर्ड को संबोधित किया और उसके बाद बोडÊ ने बजट पर चर्चा की।  आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यदि किसी बैंक को इस काम के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी तो वह भी मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बैंकों को 70,000 रुपये की अतिरिक्त पूंजी मुहैया कराने को सकारात्मक कदम बताया तथा कहा कि यह बैंकिंग क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है। बजट में पेट्रोल तथा डीजल पर कर दो-दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका पर दास ने कहा कि इसका प्रभाव तत्काल नहीं दिखेगा। उन्होंने कहा कि कर में यह बढ़ोतरी बेहद कम है तथा महंगाई पर इसके प्रभाव पर आरबीआई बोर्ड की आंतरिक बैठक में चर्चा होगी।  केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी और अप्रैल में दो बार में नीतिगत ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती की गई थी और जून के पहले सप्ताह तक बैंकों ने ऋण पर ब्याज दरों में 0.21 प्रतिशत की काटौती की थी।

जून में भी नीतिगत ब्याज दर 0.25 प्रतिशत घटाई गई थी। इसमें कितना आम ग्राहकों तक पहुंच पाया है, इसके बारे में आंकड़े अभी एकत्र किए जा रहे हैं।  वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के इस बयान पर कि सरकार को चालू वित्त वर्ष में आरबीआई से 90,000 करोड़ रुपये के लाभांश की उम्मीद है,दास ने कहा कि अभी आरबीआई का वार्षिक लेखा-जोखा अभी तैयार हो रहा है। इसके बाद आरबीआई बोर्ड सरकार को दिए जाने वाले लाभांश पर फैसला करेगा। आरबीआई का वर्ष एक जुलाई से 30 जून का होता है।  सीतारमण ने कहा कि सरकार का मानना है कि आरबीआई हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के नियमन की जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार में आंतरिक तथा आरबीआई के साथ चर्चा के बाद ही बजट में इस संबंध में प्रस्ताव किया गया है। अब तक यह जिम्मेदारी नेशनल हाउसिंग बैंक के पास थी।